छपरा तक। गंडक नदी के उफान और पानापुर के सरौजा भगवानपुर में सारण तटबंध टूटने के बाद आसपास और तटीय इलाकों में बाढ़ के पानी तबाही मचाए हुए था। गंडक के जलस्तर घटने के बाद बाढ़ के पानी में कमी आई, लेकिन तटीय इलाकों के लोगों की समस्या जस कि तस बनी हुई थी। इन सभी समस्याओं को लेकर तरैया प्रखण्ड प्रमुख प्रतिनिधि धनवीर कुमार सिंह विक्कू ने अधिकारियों के साथ बैठक कर नए रिंग बांध में लगे स्लुइस गेट को खोलने की मांग की थी।
मंगलवार को बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने पहुचे अपर समाहर्ता सारण एवं एसडीएम मढ़ौरा के समक्ष प्रमुख प्रतिनिधि ने अपनी बात रखते हुए बताया कि आकुचक-राजधानी के समीप रिंग बांध टूटने से बाढ़ का पानी आकूचक, राजधानी, चंचलिया, भलुआ, माधोपुर, जिमदाहा, शीतलपुर, हरपुर फरीदन समेत कई गांव बाढ़ के चपेट में आ गए थे। कई जगहों पर आवागमन प्रभावित होने से इन गांव का संपर्क भी बाधित हो गया था तथा रिंग बांध के बीच बसे गांव में बाढ़ का पानी जमा होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। कई हिस्सों में पानी फैल जाने से पूरा इलाज हुआ टापू जैसा दिखाई देने लगा था। ग्रामीण लगातार जल जमाव से राहत और पानी की निकासी की मांग कर रहे हैं। जिसके बाद पदाधिकारी द्वय ने नए रिंग बांध सगुनी से हसनपुर बनिया रिंग बांध में लगे दोनों स्लुइस गेट (केवरा) खोलने का त्वरित आदेश जल संसाधन विभाग को दिया गया। इसके बाद गंडक विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर कार्रवाई करते हुए स्लुइस गेट खोल दिया। स्लुइस गेट का किवाड़ खुलते ही रिंग बांध के दोनों ओर जमा बाढ़ का पानी तेजी से गंडक नदी की ओर बहने लगा। पानी की निकासी शुरू होने के साथ ही जलजमाव के स्तर में कमी आने लगी है। वहीं प्रशासन की इस कार्रवाई से सारण तटबंध और नए रिंग बांध के बीच बसे गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर उन इलाकों में स्थिति बेहतर होने की संभावना है, जहां लंबे समय से बाढ़ का पानी जमा हुआ था।


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