| रुडी ने की अधिकारियों के साथ समीक्षा, पात्र परिवारों के खाते में इसी सप्ताह पहुंचेगी सात हजार रुपये की सहायता राशि; फसल, मकान और मवेशियों की क्षति का आकलन तेज करने का निर्देश |
छपरा, 09 अक्टूबर।
सारण जिले के लगभग आधा दर्जन से अधिक प्रखंडों में आई बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब राहत और पुनर्निर्माण की चुनौती है। प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के साथ क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, तटबंधों और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करना प्रशासन की प्राथमिकता होगी। अगले छह माह में बुनियादी ढांचे की बहाली पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शुक्रवार को सारण के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बाढ़ोपरांत स्थिति की समीक्षा करते हुए राहत, स्वास्थ्य और पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया।
सांसद ने कहा कि नेपाल में अत्यधिक बारिश और अप्रत्याशित जलप्रवाह के कारण सारण सहित बिहार के कई इलाकों में बाढ़ से नुकसान हुआ है। सरयू, गंगा और गंडक नदियों से घिरे सारण जिले में पानापुर, तरैया, मकेर, अमनौर, दरियापुर, परसा, सोनपुर और रिविलगंज के विभिन्न इलाके प्रभावित हुए। कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए, जबकि घरों, फसलों, मवेशियों, सड़कों और बिजली व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है।
पात्र परिवारों को इसी सप्ताह मिलेगी सात हजार की सहायता:
रुडी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के खातों में सात हजार रुपये की सहायता राशि भेजी जा रही है। पात्र लाभार्थियों को इसी सप्ताह राशि उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। किसानों की फसल क्षति, क्षतिग्रस्त मकानों और मवेशियों के नुकसान का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि क्षति आकलन में किसी भी प्रभावित क्षेत्र या पात्र परिवार की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजा वितरित किया जा चुका है। यदि कोई पात्र परिवार अब भी इससे वंचित है, तो उसे तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए।
छह माह में सड़क, पुल और तटबंधों की बहाली का लक्ष्य:
बाढ़ से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने पर जोर देते हुए सांसद ने संबंधित विभागों को पुनर्निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। सड़कों, ग्रामीण सड़कों, पुलों, तटबंधों और बिजली व्यवस्था की मरम्मत एवं बहाली के लिए सड़क निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और विद्युत विभाग समेत संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय से काम करना होगा। फसल, मकान, सड़क और तटबंधों की क्षति का अंतिम आकलन भी जल्द पूरा करने को कहा गया है।
बाढ़ का पानी घटने के बाद संभावित संक्रामक बीमारियों और महामारी के खतरे को देखते हुए प्रभावित गांवों में चिकित्सा शिविर लगाने, शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सांसद ने स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा।
सांसद कंट्रोल रूम से लगातार पहुंचाई गई मदद:
रुडी ने राहत एवं बचाव कार्यों में जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य और बिजली विभाग, जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं तथा आम नागरिकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मुख्य सचिव और जल संसाधन विभाग के मंत्री एवं अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया। सांसद कंट्रोल रूम के टोल-फ्री नंबर 18003456222 के माध्यम से प्रभावित लोगों की सूचनाएं लेकर सहायता पहुंचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कंट्रोल रूम की टीम, मीडिया और राहत कार्य में सहयोग करने वालों के प्रति आभार जताया। बैठक में सदर एसडीओ नीतेश कुमार, मढ़ौरा एसडीओ सैयद अदील मोहसिन, सोनपुर एसडीओ स्निग्धा नेहा, सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी, अमनौर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शशांक शुभम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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