छपरा तक। गंडक नदी के जलस्तर में लगातार कमी हो रही है, लेकिन बाढ़ प्रभावित परिवारों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। तरैया और पानापुर प्रखंड क्षेत्र के कई इलाकों के लोग बाढ़ के पानी के कारण विस्थापित होकर ऊंचे स्थानों तथा सारण तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। विस्थापित लोग अपने परिवार और मवेशियों के साथ खुले आसमान के नीचे तपती धूप और अंधेरी रात में गुजर बसर करने को विवश है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर राहत और बचाव कार्य किया जा रहे हैं। फिर भी बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि पानी घटने के बाद उन्हें घर लौटने की स्थिति अभी नहीं बनी हुई हैं। कारण की कई गांव के ग्रामीण एवं सम्पर्क सड़क बाढ़ के पानी के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं, तथा अभी भी उनके घरों में चार से पांच फीट तक पानी जमे हुए हैं। वहीं उनके समक्ष अपने मवेशियों के चारे एवं अपने तथा परिवार के लिए भोजन की भी समस्याएं दिख रही है। जबकि उनके खेतों में लगे धान और मक्का कि फैसले पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, ऐसी स्थिति में उनके समक्ष भुखमरी और पशुओं के लिए चारा मिलना संभव नहीं है। वहीं बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सामुदायिक रसोई से उन्हें भोजन तो मिल रहा है, लेकिन मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा नहीं होने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। तटबंध पर लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों और पशुओं को खुले आसमान में तपती धूप में रखने को विवश हैं, जो कि उनके लिए परेशानी का सबब है।

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