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| तरैया के पचरौड़ में यात्री शेड में रह रही 64 वर्षीय विस्थापित महिला प्रभावती कुंवर की मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए छपरा भेजा। |
◆ वर्ष-2020 की बाढ़ में गोपालगंज से विस्थापित होकर महिला पहुची थी तरैया, कई वर्षों तक खुले आसमान के नीचे रहने को थी मजबूर
◆ बाद में यात्री शेड में अपना आशियाना बनाकर रहने को थी मजबूर
रंजन श्रीवास्तव। तरैया। कहने को सरकार की सारी योजनाएं समाज के उन सभी वर्गों तक पहुंच रही है। लेकिन हकीकत इससे कुछ अलग ही है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जहां तरैया के मध्य विद्यालय पचरौड़ के समीप सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे कई वर्षों तक पाल-पट्टी गिराकर गुजर बसर करने को एक बेबस महिला मजबूर थी। महिला गांव में लोगों के घर-घर जाकर भीख मांग कर अपना गुजर बसर करती थी। इधर हाल ही में महिला यात्री शेड में अपना आशियाना बनाकर रह रही थी इसी बीच रविवार कि रात्रि में अचानक उसकी मौत हो गई। मृत महिला महिला गोपालगंज जिले के सरेया हनुमानगढ़ी गांव निवासी स्व. नारायण साह की 64 वर्षीय पत्नी प्रभावती कुंवर बताई गई है। जो कि वर्ष 2020 कि बाढ़ की विभीषिका झेल कर घर से विस्थापित होकर तरैया के पचरौड़ पहुंची और मध्य विद्यालय के समीप खुले समान के नीचे पाल-पट्टी गिरा कर रहने को मजबूर हो गई थी। वह बेसहारा होकर लोगों के आगे हाथ फैला कर जीवन जीने को मजबूर थी और वह सरकार की सभी योजनाओं से वंचित थी और अंतिम समय तक उसे सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला। इधर विस्थापित महिला की मौत की सूचना मिलते ही तरैया थाने की पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए छपरा भेज दी तथा आगें की कार्रवाई में जुट गई हैं।

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