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| महाराजगंज में 103 साल पुरानी परंपरा मौनिया बाबा मेला सह राजकीय महोत्सव 2026 श्रद्धा, संस्कृति और सौहार्द के बीच संपन्न हुआ। 23 महावीरी अखाड़ों ने मेले की भव्यता बढ़ाई। |
छपरा, | 103 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक परंपरा और आस्था का प्रतीक मौनिया बाबा मेला सह राजकीय महोत्सव- 2026 शुक्रवार को श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों के बीच भव्य रूप से संपन्न हो गया। दो दिनों तक महाराजगंज अनुमंडल मुख्यालय में आस्था का जनसैलाब उमड़ता रहा। दूर- दराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं और दर्शकों से पूरा मेला परिसर गुलजार रहा। पारंपरिक महावीरी अखाड़ों की आकर्षक प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न प्रकार की दुकानों ने मेले की रौनक में चार चांद लगा दिए। वर्ष 1923 से आयोजित हो रहे मौनिया बाबा मेला उत्तर बिहार के प्रमुख पारंपरिक मेलों में अपनी अलग पहचान रखता है। भादो महीने की अमावस्या के अवसर पर लगने वाला यह मेला लंबे समय से महाराजगंज की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा रहा है। वर्ष- 2025 से इसे राजकीय महोत्सव का दर्जा मिलने के बाद इसकी प्रतिष्ठा और भव्यता में और इजाफा हुआ है।
शुभारंभ से पहले मौनिया बाबा के समाधि स्थल पर विधिवत रूप से की गई पूजा- अर्चना:
राजकीय महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विधायक हेमनारायण साह, जिला पदाधिकारी विजय प्रकाश मीणा, पुलिस अधीक्षक भारत सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ था। शुभारंभ से पहले मौनिया बाबा के समाधि स्थल पर विधिवत पूजा- अर्चना की गई। इसके बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण महावीरी अखाड़े रहा:
करीब 23 अखाड़ों के शामिल होने से पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा। अखाड़ों में शामिल युवाओं ने पारंपरिक खेल- कौशल और विभिन्न करतबों का प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। अखाड़ों को देखने के लिए सड़कों और प्रमुख स्थानों पर लोगों की भारी भीड़ जुटी। आयोजन के दौरान प्रशासन और पुलिस की ओर से विधि-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई।
पारंपरिक वस्तुओं की दुकानों पर लोगों की लगी विशेष भीड़:
जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से शांति समिति के सदस्यों तथा आम लोगों से निर्धारित नियमों का पालन करने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई थी। स्थानीय लोगों के सहयोग से दो दिवसीय आयोजन शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
मेले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिला। लकड़ी और लोहे से निर्मित पारंपरिक वस्तुओं की दुकानों पर लोगों की विशेष भीड़ रही। आलमारी, संदूक, ओखल और मूसल सहित अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीद-बिक्री ने मेले की पारंपरिक पहचान को जीवंत रखा। छोटे दुकानदारों, कारोबारियों और स्थानीय व्यवसायियों के लिए भी मेला आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहा।
सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए अगले वर्ष के मेले की प्रतीक्षा में लौट गया मेला:
राजकीय महोत्सव का दर्जा मिलने के बाद मौनिया बाबा मेला पर्यटन और रोजगार की संभावनाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया है। जिला प्रशासन की ओर से मेले की आधारभूत संरचना को और बेहतर बनाने तथा इसे व्यवस्थित एवं आकर्षक स्वरूप देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि आने वाले वर्षों में मौनिया बाबा मेला सिवान की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के रूप में और अधिक स्थापित होगा।
दो दिनों तक आस्था, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द का संदेश देने वाला यह ऐतिहासिक आयोजन शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भावपूर्ण विदाई के साथ संपन्न हुआ। मौनिया बाबा की भक्ति में डूबा महाराजगंज एक बार फिर अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए अगले वर्ष के मेले की प्रतीक्षा में लौट गया।

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